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Political Crisis In Nepal News And Updates| Prime Minister Oli Recommends Dissolution Of Parliament, Nepali Communist Party (NCP), Internal Strife in Nepali Communist Party, NCP Close To Breakdown | प्रचंड गुट ने प्रधानमंत्री ओली को NCP अध्यक्ष पद से हटाया, बोले- उन्होंने पार्टी के खिलाफ काम किया

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पार्टी के ज्यादातर नेता प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के खिलाफ हो चुके हैं। सीनियर लीडर पुष्प कमल दहल उर्फ प्रचंड भी ओली पर इस्तीफे का दबाव बनाए हुए हैं। (फाइल फोटो)

नेपाल में सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (NCP) में टूट के आसार नजर आ रहे हैं। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के बैठक बुलाकर 1199 सदस्यों की नई समिति बनाने के कुछ घंटे बाद ही प्रचंड गुट ने सेंट्रल कमेटी की मीटिंग में ओली को पार्टी चेयरमैन पद से हटा दिया।

पार्टी ने कहा कि ओली के पार्टी के खिलाफ काम किया, इसलिए उनके खिलाफ यह कार्रवाई की गई है। वहीं, सीनियर लीडर और पूर्व प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल को पार्टी का सेकंड चेयरमैन बनाया गया है।

प्रचंड पहले और नेपाल दूसरे चेयरमैन होंगे
सेंट्रल कमेटी की मेंबर रेखा शर्मा ने बताया कि प्रचंड पार्टी के पहले और नेपाल दूसरे चेयरमैन होंगे। इन्हीं दोनों के पास पार्टी की मीटिंग बुलाने का अधिकार होगा। काठमांडू पोस्ट के मुताबिक, रेखा ने यह भी बताया कि पार्टी के खिलाफ जाने की वजह से प्रधानमंत्री ओली के खिलाफ यह कार्रवाई की गई है।

ओली और प्रचंड ने अलग-अलग मीटिंग की
प्रधानमंत्री ओली और प्रचंड ने अलग-अलग पार्टी की बैठक की। पहले ओली ने अपने आधिकारिक आवास पर नई समिति का गठन किया। ओली ने यह कदम पार्टी के आम सम्मेलन में पार्टी में खुद को मजबूत करने के लिए उठाया गया।

दूसरी ओर, प्रचंड ने भी अलग से बैठक बुलाई। इसमें पार्टी के सीनियर लीडर और पूर्व प्रधानमंत्री माधव कुमार और पूर्व कृषि मंत्री घनश्याम भूशाल जैसे बड़े नेता मौजूद थे। पार्टी के दो बड़े नोताओं के आमने-सामने आने के बाद अब पार्टी में टूट के हालात बन गए हैं।

संसद भंग करने के बाद संकट गहराया
इससे पहले प्रधानमंत्री ओली की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा संसद भंग करने के बाद नेपाल में सियासी संकट गहरा गया है। ओली ने सोमवार को देश को संबोधित करते हुए कहा था कि देश और पार्टी हित में उन्होंने ये कदम उठाया है। प्रचंड और माधव कुमार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा था कि पार्टी के भीतर अंदरुनी संघर्ष ने संसद को शर्मिंदा किया है। वहीं, प्रचंड ने बयान जारी कर ओली के इस फैसले को असंवैधानिक, अलोकतांत्रिक, निरंकुश और पीछे ले जाने वाला बताया था।

ज्यादातर नेता ओली के खिलाफ
पार्टी के ज्यादातर नेता ओली के खिलाफ हो चुके हैं। वे कई दिन से उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। पिछले महीने ही ओली का विरोध कर रहे 9 नेताओं ने बंद कमरे में मीटिंग की थी। इनमें से 6 ने प्रधानमंत्री का इस्तीफा मांगा था।

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