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History

आज का इतिहास : भारत के संविधान निर्माता को क्लास में आखिरी पंक्ति में बैठाए जाता था |

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साल 1951-52। नया-नया आजाद हुआ मुल्क भारत, लोकतंत्र को अपनाकर पहले उत्सव की तैयारियों में लगा था। तमाम संदेह और आशंकाओं के बावजूद देश के लिए ये गौरव का पल था। फरवरी 1952 में चुनाव संपन्न हुए। नतीजे आए और कांग्रेस चुनाव जीत गई। नतीजों में चौंकाने वाली बात ये थी कि लोकतंत्र की आत्मा यानी संविधान को लिखने वाला नेता खुद अपना पहला चुनाव हार गया था। हम बात कर रहे हैं- संविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की।

बचपन से ही गरीबी और असमानता का साथ

14 भाइयों में सबसे छोटे अंबेडकर का जन्म आज ही के दिन इंदौर के पास छोटे से कस्बे महू में हुआ था। दलित परिवार में जन्म होने की वजह से उन्हें बचपन से ही भेदभाव का सामना करना पड़ा। अंबेडकर को स्कूल में सबसे आखिरी पंक्ति में बैठना पड़ता था। पढ़ाई में बचपन से ही अच्छे अंबेडकर मुंबई के गवर्नमेंट हाईस्कूल के पहले दलित छात्र थे।

देश में महिला सशक्तिकरण का पहला प्रयास- हिंदू कोड बिल

5 फरवरी 1951 को डॉ. अंबेडकर ने संसद में हिन्दू कोड बिल पेश किया। इसमें महिलाओं को पारिवारिक संपत्ति में अधिकार, तलाक का अधिकार, बहु विवाह पर रोक, विधवा विवाह को मान्यता जैसी बातों को हिन्दू कोड बिल में लाने की तैयारी थी। बिल संसद में पेश हुआ तो हंगामा शुरू हो गया। संसद में 3 दिन तक बहस चली।

विरोध करने वालों का तर्क था कि सिर्फ हिन्दुओं के लिए कानून क्यों लाया जा रहा है। इस कानून को सभी धर्मों पर लागू किया जाना चाहिए। बिल का विरोध बढ़ता जा रहा था। देशभर में बिल के विरोध में प्रदर्शन होने लगे। विरोध के चलते बिल उस समय पास नहीं हो सका। बाद में अंबेडकर ने हिंदू कोड बिल समेत अन्य मुद्दों को लेकर कानून मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। देश के शोषितों और वंचितों की ये आवाज 6 दिसंबर 1956 को दिल्ली में हमेशा के लिए शांत हो गई। 1990 में उन्हें मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

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