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Gayatri Mahavigyan

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नाभिपद्म भुवा विष्णेब्रह- ्मणानिर्मि- तं जगत् ।। स्थावरं जंगमं शक्त्या गायत्र्या एवं वै ध्रुवम॥ (वि- ्णोः) विष्णु की (नाभिपद्म भुवा) नाभि कमल से उत्पन्न हुए